दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना

(डीडीयू-जीकेवाई) गरीब ग्रामीण युवाओं को नौकरियों में नियमित रूप से न्यूनतम मजदूरी के बराबर या उससे ऊपर मासिक मजदूरी प्रदान करने का लक्ष्य रखता है। यह ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए की गई पहलों में से एक है। आजीविका गरीबी कम करने के लिए एक मिशन है जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) का एक हिस्सा है। इस योजना से 550 लाख से अधिक ऐसे गरीब ग्रामीण युवाओं को जो कुशल होने के लिए तैयार हैं, स्थायी रोजगार प्रदान करने के द्वारा लाभ होगा। इस योजना का महत्व गरीबी कम करने की इसकी क्षमता से है। इसकी संरचना प्रधानमंत्री के अभियान ‘मेक इन इंडिया‘ के लिए एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में की गई है।

मिशन डीडीयू-जीकेवाई

गरीबी कम करने के लिए परिवारों को नियमित रूप से मजदूरी के माध्यम से लाभकारी और स्थायी रोजगार का उपयोग करने के लिए गरीबों को सक्षम बनाना।

मार्गदर्शक सिद्धांत

  • गरीबों के बीच आर्थिक अवसरों के लिए एक मजबूत मांग है साथ ही उनके कार्य क्षमताओं को विकसित करने के संबंध में अपार अवसर हैं
  • भारत के जनसांख्यिकीय अधिशेष को एक लाभांश में विकसित करने के लिए सामाजिक एकजुटता के साथ हीं मजबूत संस्थानों के एक नेटवर्क का होना आवश्यक है
  • भारतीय और वैश्विक नियोक्ता के लिए ग्रामीण गरीबों को वांछनीय बनाने के लिए स्किलिंग के वितरण हेतु गुणवत्ता और मानक सर्वोपरि हैं।

डीडीयू-जीकेवाई के तहत स्किलिंग एवं प्लेसमेंट

  • अवसर पर समुदाय के भीतर जागरूकता का निर्माण
  • गरीब ग्रामीण युवाओं की पहचान करना
  • रुचि रखनेवाले ग्रामीण युवाओं को जुटाना
  • युवाओं और माता-पिता की काउंसिलिंग
  • योग्यता के आधार पर चयन
  • रोजगार के अवसर को बढ़ाने के लिए ज्ञान, उद्योग से जुड़े कौशल और मनोदृष्टि प्रदान करना
  • ऐसी नौकरियॉ प्रदान करना जिनका सत्यापन स्वतंत्र जांच करने के तरीकों से किया जा सके और जो न्यूनतम मजदूरी से ज्यादा भुगतान करती हों
  • नियुक्ति के बाद कार्यरत व्यक्ति को स्थिरता के लिए सहायक
डीडीयू-जीकेवाई का दृष्टिकोण
डीडीयू-जीकेवाई का दृष्टिकोण
  • प्रमुखता में बदलाव – प्रशिक्षण से कैरियर में प्रगति
  • विकास से गरीब और हाशिए पर खड़े लोगों को लाभ लेने हेतु सक्षम बनाना
  • पलायन के दर्द को कम करना जब पलायन अनिवार्य हो
  • भागीदारी के निर्माण के लिए सक्रिय दृष्टिकोण
  • इनपुट और आउटपुट की निगरानी – जहां मुख्य ध्यान प्लेसमेंट यानी उत्पादन पर है
  • यह राज्यों को डीडीयू-जीकेवाई परियोजनाओं का पूर्ण स्वामित्व लेने के लिए सक्षम बनाता है। यह फैसला किया गया है कि अब और किसी मल्टी स्टेट परियोजनाओं (एमएसपी) पर विचार नहीं किया जायेगा
  • राज्य सरकार मुख्य निर्धारक – एकल राज्य परियोजना (एसएसपी) से वार्षिक कार्य योजनाओं(एएसपी) के लिए
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय (डोनर) के सहयोग से उत्तर पूर्व के राज्यों की विशेष आवश्यकताओं और जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास के लिए विशिष्ट परियोजनाएँ
  • परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (पीआईए) की क्षमता बढ़ाना
  • सहमति और राज्य के हिस्से अनिवार्य है

डीडीयू-जीकेवाई के विशेष घटक

सामाजिक रूप से वंचित समूह के अनिवार्य कवरेज द्वारा उम्मीदवारों का पूर्ण सामाजिक समावेश सुनिश्चित किया जाता है। धन का 50% अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों, 15% अल्पसंख्यकों के लिए और 3% विकलांग व्यक्तियों के लिए के लिए निर्धारित किया जाएगा। उम्मीदवारों में एक तिहाई संख्या महिलाओं की होनी चाहिए।

जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रीय युवा उम्मीदवारों को हिमायत नाम की एक विशेष उप योजना के माध्यम से सक्षम किया गया है जो ग्रामीण विकास मंत्रालय के द्वारा राज्य के लिए एडीएसपी के तहत चल रही है एवं इसमें शहरी के साथ ही ग्रामीण युवाओं और गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) तथा साथ ही गरीबी रेखा से ऊपर ( एपीएल) को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा, रोशनी – आदिवासी क्षेत्रों और महत्वपूर्ण वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिलों के लिए एक विशेष योजना अलग दिशा निर्देशों के साथ शुरू की गयी है जो चयनित महत्वपूर्ण वामपंथी उग्रवाद जिलों में खास परिस्थितियों हेतु है। विशेष रूप से यह अलग अलग समय अवधि के लिए प्रशिक्षण प्रदान करता है।

डीडीयू-जीकेवाई के तहत कार्यान्वयन प्रतिरूप

डीडीयू-जीकेवाई एक त्रिस्तरीय कार्यान्वयन प्रतिरूप है। नीति निर्माण, तकनीकी सहायता और सरलीकरण एजेंसी के रूप में डीडीयू-जीकेवाई राष्ट्रीय यूनिट ग्रामीण विकास मंत्रालय में काम करता है। डीडीयू-जीकेवाई के राज्य मिशन कार्यान्वयन का समर्थन प्रदान करते हैं और परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसियॉ स्किलिंग और प्लेसमेंट परियोजनाओं के माध्यम से कार्यक्रम को लागू करती हैं।

डीडीयू-जीकेवाई की परियोजना अनुदान
डीडीयू-जीकेवाई की परियोजना अनुदान

डीडीयू-जीकेवाई बाजार की मांग के समाधान के लिए नियोजन से जुड़ी स्किलिंग परियोजनाओं के लिए 25,696 रूपए से लेकर 1 लाख रूपए प्रति व्यक्ति तक की वित्तीय सहायता प्रदान करता है जो परियोजना की अवधि और परियोजना के आवासीय या गैर आवासीय होने पर निर्भर करता है। डीडीयू-जीकेवाई 576 घंटे (3 महीने) से लेकर 2,304 घंटे (12 महीने) तक के प्रशिक्षण अवधि की परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करता है ।

डीडीयू-जीकेवाई के तहत अनुदान के घटक डीडीयू-जीकेवाई 250 से अधिक व्यापार क्षेत्रों जैसे खुदरा, आतिथ्य, स्वास्थ्य, निर्माण, मोटर वाहन, चमड़ा, विद्युत, पाइपलाइन, रत्न और आभूषण आदि को अनुदान प्रदान करता है। इसका एकमात्र अधिदेश है कि कौशल प्रशिक्षण मांग आधारित होना चाहिए और कम से कम 75% प्रशिक्षुओं की नियुक्ति होनी चाहिए।

परियोजनाओं के वित्त पोषण हेतु प्राथमिकता निम्न पेशकश करने वाले पीआईए को दी जाती है: :

  • विदेश प्लेसमेंट
  • कैप्टिव रोजगार: उन पीआईए या संगठनों को जो आंतरिक मानव संसाधन की जरूरत को पूरा करने के लिए कौशल प्रशिक्षण कर रहे हों
  • उद्योग इंटर्नशिप: उद्योग से सह वित्त पोषण के साथ इंटर्नशिप के लिए समर्थन
  • चैंपियन नियोक्ता: पीआईए जो 2 साल की अवधि में 10,000 डीडीयू-जीकेवाई प्रशिक्षुओं की एक न्यूनतम संख्या के लिए कौशल प्रशिक्षण और प्लेसमेंट का आश्वासन दे सकता हो
  • उच्च प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान: राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) से न्यूनतम 3.5 ग्रेडिंग प्राप्त संस्थान, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) या अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से वित्त पोषित सामुदायिक कॉलेज जो डीडीयू-जीकेवाई परियोजनाओं में रूचि रखते हों।

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